‘तेरी सांवली सूरत … ‘.

तेरी सांवली सूरत में कुछ बात तो है।
मोहब्बत है या नही, कुछ जज़्बात तो है।

तुझे पाने की दौड़ में हैं हम भी शामिल।
जीत न सही इसमे , हमारी मात तो है।

पड़ती नहीं हम पर , तेरी नज़र-ए-इनायत ।
दिल में मगर , आरजू-ए-मुलाकात तो है।

मेरी दीवानगी पर इतनी हैरत क्यू ।
तेरी इबादत में सारी कायनात तो है ।

नही है हमें , कल की फ़िक्र कोई ।
तेरी यादों की , ये हसीं रात तो है ।

http://patelsachin846.blogspot.com/2020/05/blog-post.html


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